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mahabharat 3.313.95: यक्ष ने पूछा - ऋषिगण स्थिरता किसे कहते हैं ? धैर्य किसे कहते हैं ? परम स्नान किसे कहते हैं ? और दान किसे कहते हैं ?॥95॥   |   mahabharat अध्याय 3.313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  3.313.95 
यक्ष उवाच
किं स्थैर्यमृषिभि: प्रोक्तं किं च धैर्यमुदाहृतम्।
स्नानं च किं परं प्रोक्तं दानं च किमिहोच्यते॥ ९५॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने पूछा - ऋषिगण स्थिरता किसे कहते हैं ? धैर्य किसे कहते हैं ? परम स्नान किसे कहते हैं ? और दान किसे कहते हैं ?॥95॥
 
Yaksha asked - What do the sages call stability? What is called patience? What is called the ultimate bath? And what is called charity?॥95॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)