श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  3.313.93 
यक्ष उवाच
को मोह: प्रोच्यते राजन् कश्च मान: प्रकीर्तित:।
किमालस्यं च विज्ञेयं कश्च शोक: प्रकीर्तित:॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने पूछा - हे राजन! आसक्ति किसे कहते हैं? अभिमान किसे कहते हैं? आलस्य किसे जानना चाहिए? और शोक किसे कहते हैं?॥93॥
 
The Yaksha asked - O King! What is called attachment? What is called pride? What should be known as laziness? And what is called grief?॥93॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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