श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  3.313.90 
युधिष्ठिर उवाच
ज्ञानं तत्त्वार्थसम्बोध: शमश्चित्तप्रशान्तता।
दया सर्वसुखैषित्वमार्जवं समचित्तता॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - परमात्म-साक्षात्कार ही ज्ञान है, मन की शांति ही लज्जा है, सबके सुख की कामना ही उत्तम दया है और समबुद्धि ही आर्जव (सरलता) है ॥90॥
 
Yudhishthir said - True realization of the Supreme Being is knowledge, peace of mind is shame, wishing for everyone's happiness is the best kindness and being equal-minded is Arjava (simplicity). 90॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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