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श्लोक 3.313.89  |
यक्ष उवाच
किं ज्ञानं प्रोच्यते राजन् क: शमश्च प्रकीर्तित:।
दया च का परा प्रोक्ता किं चार्जवमुदाहृतम्॥ ८९॥ |
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| अनुवाद |
| यक्ष ने पूछा - हे राजन ! ज्ञान किसे कहते हैं ? शम किसे कहते हैं ? उत्तम दया किसे कहते हैं ? और आर्जव (सरलता) किसे कहते हैं ?॥ 89॥ |
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| The Yaksha asked - O King! What is knowledge? What is called 'Sham'? What is called 'Uttam Mercy'? And what is called 'Arjav' (simplicity)?॥ 89॥ |
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