श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  3.313.87 
यक्ष उवाच
तप: किं लक्षणं प्रोक्तं को दमश्च प्रकीर्तित:।
क्षमा च का परा प्रोक्ता का च ह्री: परिकीर्तिता॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने पूछा, "तपस्या के लक्षण क्या हैं? आत्म-संयम किसे कहते हैं? परम क्षमा किसे कहते हैं? और लज्जा किसे कहते हैं?"
 
The Yaksha asked, "What are the characteristics of tapasya? What is called self-control? What is called supreme forgiveness? And what is called shame?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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