श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  3.313.85 
यक्ष उवाच
का दिक् किमुदकं प्रोक्तं किमन्नं किं च वै विषम्।
श्राद्धस्य कालमाख्याहि तत: पिब हरस्व च॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने पूछा - दिशा क्या है? जल क्या है? भोजन क्या है? विष क्या है? और श्राद्ध का समय क्या है? यह मुझे बताओ। इसके बाद जल पीकर ले जाओ। 85.
 
The Yaksha asked - What is the direction? What is the water? What is the food? What is the poison? And what is the time of the Shraadh? Tell me this. After this drink the water and take it away. 85.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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