श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  3.313.82 
युधिष्ठिर उवाच
अज्ञानेनावृतो लोकस्तमसा न प्रकाशते।
लोभात् त्यजति मित्राणि संगात् स्वर्गं न गच्छति॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - संसार अज्ञान से ढका हुआ है, तमोगुण के कारण उसमें प्रकाश नहीं होता, लोभ के कारण मनुष्य अपने मित्रों को त्याग देता है और आसक्ति के कारण स्वर्ग में नहीं जाता ॥82॥
 
Yudhishthir said - The world is covered with ignorance, due to the mode of ignorance it does not shine, due to greed man abandons his friends and due to attachment does not go to heaven. 82॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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