श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  3.313.81 
यक्ष उवाच
केनस्विदावृतो लोक: केनस्विन्न प्रकाशते।
केन त्यजति मित्राणि केन स्वर्गं न गच्छति॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने पूछा, "वह कौन सी चीज़ है जो संसार को ढकती है? किस कारण से यह प्रकाशित नहीं होती? मनुष्य अपने मित्रों का त्याग क्यों करता है? और वह स्वर्ग क्यों नहीं जाता?"
 
The Yaksha asked, "What is the thing that covers the world? Because of what is it not illuminated? Why does a man abandon his friends? And why does he not go to heaven?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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