श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  3.313.76 
युधिष्ठिर उवाच
आनृशंस्यं परो धर्मस्त्रयीधर्म: सदाफल:।
मनो यम्य न शोचन्ति संधि: सद्भिर्न जीर्यते॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - संसार में दया ही सर्वश्रेष्ठ धर्म है, वेदों में उपदेशित धर्म सदैव फलदायी होता है, मन को वश में रखने से मनुष्य शोक नहीं करते और सत्पुरुषों के साथ की गई मित्रता नष्ट नहीं होती ॥76॥
 
Yudhishthir said - Kindness is the best religion in the world, the religion preached in the Vedas is always fruitful, by keeping the mind under control, people do not grieve and the friendship made with good men does not get destroyed. 76॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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