श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  3.313.71 
यक्ष उवाच
किंस्विदात्मा मनुष्यस्य किंस्विद् दैवकृत: सखा।
उपजीवनं किंस्विदस्य किंस्विदस्य परायणम्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने पूछा - मनुष्य की आत्मा क्या है? उसका दिव्य मित्र कौन है? उसके जीवन का आधार क्या है? और उसका परम आश्रय क्या है?
 
Yaksha asked - What is the soul of a human being? Who is its divine friend? What is its support of life? And what is its ultimate refuge?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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