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श्लोक  3.313.70 
युधिष्ठिर उवाच
दाक्ष्यमेकपदं धर्म्यं दानमेकपदं यश:।
सत्यमेकपदं स्वर्ग्यं शीलमेकपदं सुखम्॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा - धर्म का मुख्य स्थान कुशलता है, यश का मुख्य स्थान दान है, स्वर्ग का मुख्य स्थान सत्य है और सुख का मुख्य स्थान शील है। 70.
 
Yudhishthira said - The main place of religion is efficiency, the main place of fame is charity, the main place of heaven is truth and the main place of happiness is morality. 70.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)