श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  3.313.69 
यक्ष उवाच
किंस्विदेकपदं धर्म्यं किंस्विदेकपदं यश:।
किंस्विदेकपदं स्वर्ग्यं किंस्विदेकपदं सुखम्॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने पूछा - धर्म का मुख्य स्थान क्या है ? यश का मुख्य स्थान क्या है ? स्वर्ग का मुख्य स्थान क्या है ? और सुख का मुख्य स्थान क्या है ?॥69॥
 
Yaksha asked - What is the main place of Dharma? What is the main place of fame? What is the main place of heaven? And what is the main place of happiness?॥ 69॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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