श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  3.313.68 
युधिष्ठिर उवाच
सूर्य एको विचरते चन्द्रमा जायते पुन:।
अग्निर्हिमस्य भैषज्यं भूमिरावपनं महत्॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - सूर्य अकेला ही विचरण करता है, चन्द्रमा एक बार जन्म लेता है और फिर पुनः जन्म लेता है, अग्नि सर्दी की औषधि है और पृथ्वी एक विशाल आवरण है।
 
Yudhishthira said - The Sun moves about alone, the Moon is born once and then is reborn again, the fire is the medicine for cold and the Earth is a huge covering.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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