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श्लोक 3.313.65  |
यक्ष उवाच
कोऽतिथि: सर्वभूतानां किंस्विद् धर्मं सनातनम्।
अमृतं किंस्विद् राजेन्द्र किंस्वित् सर्वमिदं जगत्॥ ६५॥ |
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| अनुवाद |
| यक्ष ने पूछा - राजेन्द्र! समस्त प्राणियों का अतिथि कौन है? सनातन धर्म क्या है? अमृत क्या है? और यह सम्पूर्ण जगत् क्या है?॥65॥ |
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| The Yaksha asked - Rajendra! Who is the guest of all beings? What is Sanatan Dharma? What is Amrit? And what is this whole world?॥ 65॥ |
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