श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  3.313.65 
यक्ष उवाच
कोऽतिथि: सर्वभूतानां किंस्विद् धर्मं सनातनम्।
अमृतं किंस्विद् राजेन्द्र किंस्वित् सर्वमिदं जगत्॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने पूछा - राजेन्द्र! समस्त प्राणियों का अतिथि कौन है? सनातन धर्म क्या है? अमृत क्या है? और यह सम्पूर्ण जगत् क्या है?॥65॥
 
The Yaksha asked - Rajendra! Who is the guest of all beings? What is Sanatan Dharma? What is Amrit? And what is this whole world?॥ 65॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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