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mahabharat 3.313.63: यक्ष ने पूछा, "यात्री का मित्र कौन है? गृहस्थ का मित्र कौन है? रोगी का मित्र कौन है? तथा मरणासन्न व्यक्ति का मित्र कौन है?"   |   mahabharat अध्याय 3.313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  3.313.63 
यक्ष उवाच
किंस्वित् प्रवसतो मित्रं किंस्विन्मित्रं गृहे सत:।
आतुरस्य च किं मित्रं किंस्विन्मित्रं मरिष्यत:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने पूछा, "यात्री का मित्र कौन है? गृहस्थ का मित्र कौन है? रोगी का मित्र कौन है? तथा मरणासन्न व्यक्ति का मित्र कौन है?"
 
The Yaksha asked, "Who is the friend of a traveller? Who is the friend of a householder? Who is the friend of a sick man? And who is the friend of a man who is near death?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)