श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  3.313.62 
युधिष्ठिर उवाच
मत्स्य: सुप्तो न निमिषत्यण्डं जातं न चोपति।
अश्मनो हृदयं नास्ति नदी वेगेन वर्धते॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा, "मछली सोते समय भी अपनी आंखें बंद नहीं करती; अंडा उत्पन्न होने पर भी हिलता नहीं; पत्थर में हृदय नहीं होता और नदी तीव्र गति से बहती है।"
 
Yudhishthira said, "A fish does not close its eyes even when it is sleeping; an egg does not move even after being produced; a stone has no heart and a river flows rapidly." 62.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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