श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  3.313.61 
यक्ष उवाच
किंस्वित् सुप्तं न निमिषति किंस्विज्जातं न चोपति।
कस्यस्विद्‍धृदयं नास्ति किंस्विद् वेगेन वर्धते॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने पूछा, "कौन सोते समय भी अपनी आँखें बंद नहीं करता? कौन जन्म लेने के बाद भी हिलता-डुलता नहीं है? किसके पास हृदय नहीं है? और कौन तेजी से बढ़ता है?"
 
The Yaksha asked, "Who does not close his eyes even when he is sleeping? Who does not move even after being born? Who does not have a heart? And who grows rapidly?"
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas