श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  3.313.60 
युधिष्ठिर उवाच
माता गुरुतरा भूमे: खात् पितोच्चतरस्तथा।
मन: शीघ्रतरं वाताच्चिन्ता बहुतरी तृणात्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा - माता की महिमा पृथ्वी से भी महान है। पिता आकाश से भी ऊँचा है। मन वायु से भी अधिक तीव्र गति से चलता है और चिंताएँ तिनकों से भी अधिक असंख्य और अनंत हैं।
 
Yudhishthira said - Mother's glory is greater than the earth. Father is higher than the sky. Mind moves faster than the wind and worries are more numerous and infinite than straws.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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