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mahabharat 3.313.6-7h: साधारण मनुष्यों के वचन और वचन झूठे निकलते हैं; परन्तु आपके विषय में कहे गए ईश्वरीय संदेश कैसे झूठे हो सकते हैं?॥6 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  3.313.6-7h 
मनुष्यसम्भवा वाचो विधर्मिण्य: प्रतिश्रुता:॥ ६॥
भवतां दिव्यवाचस्तु ता भवन्तु कथं मृषा।
 
 
अनुवाद
साधारण मनुष्यों के वचन और वचन झूठे निकलते हैं; परन्तु आपके विषय में कहे गए ईश्वरीय संदेश कैसे झूठे हो सकते हैं?॥6 1/2॥
 
‘The words and promises of ordinary men turn out to be false; but how can the divine messages spoken about you be false?॥ 6 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)