श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  3.313.59 
यक्ष उवाच
किंस्विद् गुरुतरं भूमे: किंस्विदुच्चतरं च खात्।
किंस्विच्छीघ्रतरं वायो: किंस्विद् बहुतरं तृणात्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने पूछा, "पृथ्वी से भारी क्या है? आकाश से ऊंचा क्या है? वायु से तेज क्या चलता है? तथा तिनकों से अधिक संख्या में क्या है?"
 
The Yaksha asked, "What is heavier than the earth? What is higher than the sky? What moves faster than the wind? And what is more numerous than straws?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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