श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  3.313.53 
यक्ष उवाच
किमेकं यज्ञियं साम किमेकं यज्ञियं यजु:।
का चैषां वृणुते यज्ञं कां यज्ञो नातिवर्तते॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने पूछा - कौन-सी वस्तु यज्ञ साम है ? कौन-सी (यज्ञ से संबंधित) यज्ञ यजु है ? कौन-सी वस्तु यज्ञ को चुनती है ? और किसका त्याग नहीं होता ? 53॥
 
Yaksha asked – Which one thing is Yagya Sama? Which one (related to Yagya) is Yagya Yaju? Which one thing chooses Yagya? And whose sacrifice does not transcend? 53॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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