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श्लोक 3.313.51  |
यक्ष उवाच
किं क्षत्रियाणां देवत्वं कश्च धर्म: सतामिव।
कश्चैषां मानुषो भाव: किमेषामसतामिव॥ ५१॥ |
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| अनुवाद |
| यक्ष ने पूछा - क्षत्रियों में देवत्व क्या है ? सज्जनों के समान उनका धर्म क्या है ? उनका मानव स्वभाव क्या है ? और दुष्टों के समान उनका आचरण क्या है ?॥ 51॥ |
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| Yaksha asked - What is the divinity in Kshatriyas? What is their religion like that of good men? What is their human nature? And what is their conduct like that of bad men?॥ 51॥ |
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