श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  3.313.47 
यक्ष उवाच
केनस्विच्छ्रोत्रियो भवति केनस्विद् विन्दते महत्।
केनस्विद् द्वितीयवान् भवति राजन् केन च बुद्धिमान्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने पूछा: हे राजन! मनुष्य किस प्रकार श्रोत्रिय बनता है ? किस प्रकार वह महान पद प्राप्त करता है ? किस प्रकार वह द्वितीय बनता है ? और किस प्रकार वह बुद्धिमान बनता है ?॥ 47॥
 
The Yaksha asked: O King! By what means does a man become a Shrotri? By what means does he achieve the great position? By what means does he become second? And by what means does he become intelligent?॥ 47॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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