श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  3.313.46 
युधिष्ठिर उवाच
ब्रह्मादित्यमुन्नयति देवास्तस्याभितश्चरा:।
धर्मश्चास्तं नयति च सत्ये च प्रतितिष्ठति॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा:- ब्रह्मा सूर्य को उठाते हैं, देवता उसकी परिक्रमा करते हैं, धर्म उसे अस्त करता है और वह सत्य में स्थित होता है।
 
Yudhishthira said: - Brahma raises the Sun, the gods move around it, Dharma makes it set and he is established in Truth.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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