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श्लोक 3.313.46  |
युधिष्ठिर उवाच
ब्रह्मादित्यमुन्नयति देवास्तस्याभितश्चरा:।
धर्मश्चास्तं नयति च सत्ये च प्रतितिष्ठति॥ ४६॥ |
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| अनुवाद |
| युधिष्ठिर ने कहा:- ब्रह्मा सूर्य को उठाते हैं, देवता उसकी परिक्रमा करते हैं, धर्म उसे अस्त करता है और वह सत्य में स्थित होता है। |
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| Yudhishthira said: - Brahma raises the Sun, the gods move around it, Dharma makes it set and he is established in Truth. |
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