श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  3.313.45 
यक्ष उवाच
किं स्विदादित्यमुन्नयति के च तस्याभितश्चरा:।
कश्चैनमस्तं नयति कस्मिंश्च प्रतितिष्ठति॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने पूछा, "सूर्य को कौन उठाता है? उसके चारों ओर कौन घूमता है? उसे कौन अस्त करता है? और वह किसमें स्थित है?"
 
The Yaksha asked, "Who raises the Sun? Who moves around it? Who makes it set? And in what is it situated?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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