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यक्ष उवाच
यक्षोऽहमस्मि भद्रं ते नास्मि पक्षी जलेचर:॥ ३६॥
मयैते निहता: सर्वे भ्रातरस्ते महौजस:।
अनुवाद
यक्ष ने कहा, "आपका कल्याण हो। मैं कोई जलचर पक्षी नहीं हूँ, मैं तो यक्ष हूँ। आपके ये सभी महान और यशस्वी भाई मेरे द्वारा मारे गए हैं।"
The Yaksha said, "May you be blessed. I am not an aquatic bird, I am a Yaksha. All these great and illustrious brothers of yours have been killed by me."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥