श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.313.29 
यक्ष उवाच
अहं बक: शैवलमत्स्यभक्षो
नीता मया प्रेतवशं तवानुजा:।
त्वं पञ्चमो भविता राजपुत्र
न चेत् प्रश्नान् पृच्छतो व्याकरोषि॥ २९॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने कहा- राजकुमार! मैं प्याज और मछली खाने वाला बगुला हूँ। मैंने ही तुम्हारे छोटे भाइयों को यमलोक भेजा है; अतः यदि मेरे पूछने पर तुम मेरे प्रश्नों का उत्तर नहीं दोगे तो तुम भी यमलोक के पाँचवें अतिथि होगे।
 
Yaksha said- Prince! I am a heron who eats scallions and fish. I am the one who has sent your younger brothers to Yamaloka; therefore, if you do not answer my questions when I ask you, then you will also be the fifth guest of Yamaloka.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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