श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.313.22 
एकाग्रं चिन्तयिष्यामि पीत्वा वेत्स्यामि वा जलम्।
स्यात् तु दुर्योधनेनेदमुपांशुविहितं कृतम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
मैं इस विषय पर पुनः विचार करूँगा अथवा जल पीकर इस रहस्य को समझने का प्रयत्न करूँगा। सम्भव है दुर्योधन ने गुप्त रूप से कोई षड्यन्त्र रचा हो। 22।
 
I will think again after concentrating on this matter or I will try to understand this mystery after drinking some water. It is possible that Duryodhan has secretly hatched some conspiracy. 22.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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