श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.313.18 
इतिकर्तव्यतां चेति देशकालविभागवित्।
नाभिपेदे महाबाहुश्चिन्तयानो महामति:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वे भी सोचने लगे कि ‘अब क्या करना चाहिए?’ अत्यन्त बुद्धिमान और बलवान युधिष्ठिर देश और काल के तत्त्वों को पृथक्-पृथक् जानने वाले थे; फिर भी बहुत सोचने-विचारने पर भी वे किसी निर्णय पर न पहुँच सके॥18॥
 
They also started thinking, 'What should be done now?' The very intelligent and powerful Yudhishthir was the one who knew the elements of space and time separately; Yet even after much thought and consideration they could not reach any decision. 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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