Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.313.129: हे यक्ष! मैं वास्तव में अहिंसा (दया और समता) को ही परम धर्म मानता हूँ। ऐसा सोचकर मैं सबके प्रति दया और समता का व्यवहार करना चाहता हूँ; इसलिए नकुल जीवित रहें। 129. | mahabharat अध्याय 3.313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे यक्ष! मैं वास्तव में अहिंसा (दया और समता) को ही परम धर्म मानता हूँ। ऐसा सोचकर मैं सबके प्रति दया और समता का व्यवहार करना चाहता हूँ; इसलिए नकुल जीवित रहें। 129.
O Yaksh! I think that in reality non-cruelty (kindness and equality) is the ultimate religion. Thinking this, I want to be kind and equal towards everyone; therefore Nakul should be alive. 129.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥