श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  3.313.127 
यस्य बाहुबलं सर्वे पाण्डवा: समुपासते।
अर्जुनं तमपाहाय नकुलं जीवमिच्छसि॥ १२७॥
 
 
अनुवाद
जिसके भुजबल पर समस्त पाण्डवों को पूर्ण विश्वास है, उस अर्जुन को छोड़कर आप नकुल को क्यों बचाना चाहते हैं?॥127॥
 
Why do you wish to save Nakul instead of Arjuna, in whose physical strength all the Pandavas have full faith?॥ 127॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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