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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना
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श्लोक 121
श्लोक
3.313.121
तुल्ये प्रियाप्रिये यस्य सुखदु:खे तथैव च।
अतीतानागते चोभे स वै सर्वधनी नर:॥ १२१॥
अनुवाद
जो पुरुष राग-द्वेष, सुख-दुःख, भूत-भविष्य इन विपरीतताओं में सम है, वही सबसे धनवान है ॥121॥
The man who is equal in the opposites of like-dislike, happiness-sorrow, past-future, is the richest person of all. ॥ 121॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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