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mahabharat 3.313.117: तर्क कहीं टिकता नहीं, भिन्न-भिन्न श्रुतियाँ हैं, एक भी ऋषि ऐसा नहीं है जिसका मत प्रमाण माना जा सके और धर्म का सार गुफा में छिपा है अर्थात् अत्यन्त गूढ़ है; अतः महापुरुषों द्वारा अपनाया गया मार्ग ही एकमात्र सच्चा मार्ग है ॥117॥   |   mahabharat अध्याय 3.313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  3.313.117 
तर्कोऽप्रतिष्ठ: श्रुतयो विभिन्ना
नैको ऋषिर्यस्य मतं प्रमाणम्।
धर्मस्य तत्त्वं निहितं गुहायां
महाजनो येन गत: स पन्था:॥ ११७॥
 
 
अनुवाद
तर्क कहीं टिकता नहीं, भिन्न-भिन्न श्रुतियाँ हैं, एक भी ऋषि ऐसा नहीं है जिसका मत प्रमाण माना जा सके और धर्म का सार गुफा में छिपा है अर्थात् अत्यन्त गूढ़ है; अतः महापुरुषों द्वारा अपनाया गया मार्ग ही एकमात्र सच्चा मार्ग है ॥117॥
 
Logic has no standing anywhere, there are different Shrutis (scriptures), there is not a single Rishi whose opinion can be accepted as evidence and the essence of religion is hidden in a cave i.e. it is extremely esoteric; hence the path followed by great men is the only true path. ॥ 117॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)