Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.313.115: युधिष्ठिर बोले - हे जलराक्षस! जो मनुष्य कर्ज में न डूबा हो और परदेश में न हो, वह यदि पाँचवें या छठे दिन भी अपने घर में पका हुआ शाक खा ले, तो भी वह सुखी रहता है। | mahabharat अध्याय 3.313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
पञ्चमेऽहनि षष्ठे वा शाकं पचति स्वे गृहे।
अनृणी चाप्रवासी च स वारिचर मोदते॥ ११५॥
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - हे जलराक्षस! जो मनुष्य कर्ज में न डूबा हो और परदेश में न हो, वह यदि पाँचवें या छठे दिन भी अपने घर में पका हुआ शाक खा ले, तो भी वह सुखी रहता है।
Yudhishthira said - O aquatic demon! A man who is not in debt and is not abroad, even if he eats cooked vegetables in his house on the fifth or sixth day, he is still happy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥