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श्लोक 3.313.113  |
युधिष्ठिर उवाच
प्रियवचनवादी प्रियो भवति
विमृशितकार्यकरोऽधिकं जयति।
बहुमित्रकर: सुखं वसते
यश्च धर्मरत: स गतिं लभते॥ ११३॥ |
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| अनुवाद |
| युधिष्ठिर बोले - मधुर वचन बोलने वाले मनुष्य को सब लोग प्रेम करते हैं, सोच-समझकर काम करने वाला मनुष्य अधिकतर सफल होता है, बहुत से मित्र बनाने वाला मनुष्य सुखपूर्वक रहता है और सदाचारी मनुष्य मोक्ष प्राप्त करता है ॥113॥ |
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| Yudhishthira said - Everyone loves a person who speaks sweet words, a person who works after careful consideration is mostly successful, a person who makes many friends lives happily and a person who is virtuous attains salvation. ॥113॥ |
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