श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  3.313.113 
युधिष्ठिर उवाच
प्रियवचनवादी प्रियो भवति
विमृशितकार्यकरोऽधिकं जयति।
बहुमित्रकर: सुखं वसते
यश्च धर्मरत: स गतिं लभते॥ ११३॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - मधुर वचन बोलने वाले मनुष्य को सब लोग प्रेम करते हैं, सोच-समझकर काम करने वाला मनुष्य अधिकतर सफल होता है, बहुत से मित्र बनाने वाला मनुष्य सुखपूर्वक रहता है और सदाचारी मनुष्य मोक्ष प्राप्त करता है ॥113॥
 
Yudhishthira said - Everyone loves a person who speaks sweet words, a person who works after careful consideration is mostly successful, a person who makes many friends lives happily and a person who is virtuous attains salvation. ॥113॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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