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mahabharat 3.313.112: यक्ष ने पूछा, "बताओ, जो व्यक्ति मधुर वचन बोलता है, उसे क्या मिलता है? जो व्यक्ति सोच-समझकर काम करता है, उसे क्या मिलता है? जो व्यक्ति बहुत से मित्र बनाता है, उसे क्या मिलता है? और जो व्यक्ति धार्मिक है, उसे क्या मिलता है?"   |   mahabharat अध्याय 3.313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  3.313.112 
यक्ष उवाच
प्रियवचनवादी किं लभते
विमृशितकार्यकर: किं लभते।
बहुमित्रकर: किं लभते
धर्मरत: किं लभते कथय॥ ११२॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने पूछा, "बताओ, जो व्यक्ति मधुर वचन बोलता है, उसे क्या मिलता है? जो व्यक्ति सोच-समझकर काम करता है, उसे क्या मिलता है? जो व्यक्ति बहुत से मित्र बनाता है, उसे क्या मिलता है? और जो व्यक्ति धार्मिक है, उसे क्या मिलता है?"
 
The Yaksha asked, "Tell me, what does a person who speaks sweet words get? What does a person who works after thinking about things get? What does a person who makes many friends gain? And what does a person who is pious get?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)