Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.313.111: जो व्यक्ति चारों वेदों का अध्ययन करने के बावजूद दुष्ट है, वह अपने बुरे आचरण में शूद्र से भी बदतर है। जो व्यक्ति अग्निहोत्र करने में सदैव तत्पर रहता है और अपनी इंद्रियों को वश में रखता है, उसे ब्राह्मण कहा जाता है। | mahabharat अध्याय 3.313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
चतुर्वेदोऽपि दुर्वृत्त: स शूद्रादतिरिच्यते।
योऽग्निहोत्रपरो दान्त: स ब्राह्मण इति स्मृत:॥ १११॥
अनुवाद
जो व्यक्ति चारों वेदों का अध्ययन करने के बावजूद दुष्ट है, वह अपने बुरे आचरण में शूद्र से भी बदतर है। जो व्यक्ति अग्निहोत्र करने में सदैव तत्पर रहता है और अपनी इंद्रियों को वश में रखता है, उसे ब्राह्मण कहा जाता है।
A person who is wicked despite having read all the four Vedas is worse than a Shudra in his evil ways. A person who is always ready to perform Agnihotra and has controlled his senses is called a Brahmin.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥