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mahabharat 3.313.11-12: जो किसी भी अस्त्र से अजेय थे, जो रणभूमि में उन्मत्त होकर युद्ध करते थे और जो सदैव शत्रुओं का नाश करते थे, वे कुन्ती के दोनों पराक्रमी पुत्र भीमसेन और अर्जुन आज अचानक शत्रुओं के वश में कैसे आ गए?॥ 11-12॥   |   mahabharat अध्याय 3.313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  3.313.11-12 
रणे प्रमत्तौ वीरौ च सदा शत्रुनिबर्हणौ॥ ११॥
कथं रिपुवशं यातौ कुन्तीपुत्रौ महाबलौ।
यौ सर्वास्त्राप्रतिहतौ भीमसेनधनंजयौ॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जो किसी भी अस्त्र से अजेय थे, जो रणभूमि में उन्मत्त होकर युद्ध करते थे और जो सदैव शत्रुओं का नाश करते थे, वे कुन्ती के दोनों पराक्रमी पुत्र भीमसेन और अर्जुन आज अचानक शत्रुओं के वश में कैसे आ गए?॥ 11-12॥
 
How did Kunti's two mighty sons, Bhimasena and Arjuna, who were unstoppable by any weapon, who fought like mad in the battlefield and who always destroyed their enemies, suddenly fall under the control of the enemy today?॥ 11-12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)