श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  3.313.109 
वृत्तं यत्नेन संरक्ष्यं ब्राह्मणेन विशेषत:।
अक्षीणवृत्तो न क्षीणो वृत्ततस्तु हतो हत:॥ १०९॥
 
 
अनुवाद
अतः सदाचार की रक्षा करने का प्रयत्न करना चाहिए। ब्राह्मण को इस पर विशेष ध्यान रखना आवश्यक है; क्योंकि जिसका सदाचार अक्षुण्ण है, उसका ब्राह्मणत्व भी अक्षुण्ण रहता है और जिसका आचरण नष्ट हो जाता है, वह स्वयं नष्ट हो जाता है॥109॥
 
Therefore, one should try to protect good conduct. It is necessary for a Brahmin to keep a special watch on it; because one whose good conduct is intact, his brahminhood is also intact and one whose conduct is destroyed, he himself is destroyed.॥ 109॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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