श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  3.313.108 
युधिष्ठिर उवाच
शृणु यक्ष कुलं तात न स्वाध्यायो न च श्रुतम्।
कारणं हि द्विजत्वे च वृत्तमेव न संशय:॥ १०८॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "हे यक्ष! सुनो, न तो स्वाध्याय और न ही शास्त्रों का श्रवण ही ब्राह्मण होने का कारण है। आचरण ही ब्राह्मण होने का कारण है, इसमें संशय नहीं है।"
 
Yudhishthira said, "My dear Yaksha! Listen, neither self-study nor listening to scriptures is the reason for being a Brahmin. Conduct is the reason for being a Brahmin, there is no doubt about it."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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