श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  3.313.107 
यक्ष उवाच
राजन् कुलेन वृत्तेन स्वाध्यायेन श्रुतेन वा।
ब्राह्मण्यं केन भवति प्रब्रूह्येतत् सुनिश्चितम्॥ १०७॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने पूछा, "हे राजन! वंश, आचरण, स्वाध्याय और शास्त्र श्रवण - इनमें से किसके द्वारा ब्राह्मणत्व सिद्ध होता है? निर्णय करके मुझे बताइए।"
 
The Yaksha asked, "O King! By which of these - lineage, conduct, self-study and listening to scriptures - one can prove one's brahminhood? Tell me this after deciding."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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