Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.313.106: जो धन-सम्पत्ति होते हुए भी लोभ के कारण दान देने और उसका उपभोग करने से विमुख हो जाता है और बाद में मांगने वाले ब्राह्मणों आदि से तथा अपनी स्त्री और बच्चों से कहता है कि मेरे पास कुछ भी नहीं है, वह अनन्त नरक में जाता है ॥106॥ | mahabharat अध्याय 3.313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो धन-सम्पत्ति होते हुए भी लोभ के कारण दान देने और उसका उपभोग करने से विमुख हो जाता है और बाद में मांगने वाले ब्राह्मणों आदि से तथा अपनी स्त्री और बच्चों से कहता है कि मेरे पास कुछ भी नहीं है, वह अनन्त नरक में जाता है ॥106॥
He who, despite having wealth, due to greed, refrains from giving charity and enjoying it, and later tells the Brahmins and other men who ask for it, and his wife and children that he has nothing, goes to the eternal hell. ॥106॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥