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mahabharat 3.313.105: जो मनुष्य वेद, धर्मशास्त्र, ब्राह्मण, देवता और पितृ धर्मों में मिथ्या बुद्धि रखता है, वह अनन्त नरक में जाता है ॥105॥   |   mahabharat अध्याय 3.313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.313.105 
वेदेषु धर्मशास्त्रेषु मिथ्या यो वै द्विजातिषु।
देवेषु पितृधर्मेषु सोऽक्षयं नरकं व्रजेत्॥ १०५॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य वेद, धर्मशास्त्र, ब्राह्मण, देवता और पितृ धर्मों में मिथ्या बुद्धि रखता है, वह अनन्त नरक में जाता है ॥105॥
 
The person who has false intellect in Vedas, Dharmashastra, Brahmins, Gods and ancestral religions, goes to eternal hell. 105॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)