श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  3.313.101 
यक्ष उवाच
धर्मश्चार्थश्च कामश्च परस्परविरोधिन:।
एषां नित्यविरुद्धानां कथमेकत्र संगम:॥ १०१॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने पूछा - धर्म, अर्थ और काम ये सब परस्पर विरोधी हैं। ये नित्य विरोधी पुरुषार्थ एक स्थान पर कैसे एकत्रित हो सकते हैं?॥101॥
 
The Yaksha asked - Dharma, Artha and Kama are all opposed to each other. How can these eternally opposed efforts come together in one place?॥101॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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