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mahabharat 3.313.10-11h: वह महाबली अर्जुन आज कैसे मृत्यु को प्राप्त हो गया? यह वही धनंजय है, जो मेरी आशारूपी लता को तोड़कर पृथ्वी पर पड़ा है; उसी को अपना रक्षक बनाकर और उसी पर इतना विश्वास करके हम सब ये सब दुःख सह रहे हैं॥ 10 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  3.313.10-11h 
सोऽयं मृत्युवशं यात: कथं जिष्णुर्महाबल:।
अयं ममाशां संहत्य शेते भूमौ धनंजय:॥ १०॥
आश्रित्य यं वयं नाथं दु:खान्येतानि सेहिम।
 
 
अनुवाद
वह महाबली अर्जुन आज कैसे मृत्यु को प्राप्त हो गया? यह वही धनंजय है, जो मेरी आशारूपी लता को तोड़कर पृथ्वी पर पड़ा है; उसी को अपना रक्षक बनाकर और उसी पर इतना विश्वास करके हम सब ये सब दुःख सह रहे हैं॥ 10 1/2॥
 
How did that mighty Arjuna succumb to death today? This is the same Dhananjaya who is lying on the ground after breaking my creeper of hope; making him our protector and trusting him so much we have been enduring all these miseries.॥ 10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)