Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.312.5-6: वैशम्पायन कहते हैं- तत्पश्चात राजा युधिष्ठिर ने नकुल से कहा- 'माद्रिननन्दन! एक वृक्ष पर चढ़कर सब दिशाओं में देखो। यदि निकट में जल हो, तो देखो अथवा जल के किनारे उगे हुए वृक्षों को देखो। पिताश्री! आपके ये भाई थके हुए और प्यासे हैं।'॥5-6॥ | mahabharat अध्याय 3.312: पानी लानेके लिये गये हुए नकुल आदि चार भाइयोंका सरोवरके तटपर अचेत होकर गिरना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन कहते हैं- तत्पश्चात राजा युधिष्ठिर ने नकुल से कहा- 'माद्रिननन्दन! एक वृक्ष पर चढ़कर सब दिशाओं में देखो। यदि निकट में जल हो, तो देखो अथवा जल के किनारे उगे हुए वृक्षों को देखो। पिताश्री! आपके ये भाई थके हुए और प्यासे हैं।'॥5-6॥
Vaishampayana says- Thereafter King Yudhishthira said to Nakula- 'Madrinanandan! Climb a tree and look in all directions. If there is water nearby, then see or look at the trees growing on the banks of water. Father! These brothers of yours are tired and thirsty.'॥ 5-6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥