श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 312: पानी लानेके लिये गये हुए नकुल आदि चार भाइयोंका सरोवरके तटपर अचेत होकर गिरना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  3.312.44 
स गच्छन् कानने तस्मिन् हेमजालपरिष्कृतम्।
ददर्श तत् सर: श्रीमान् विश्वकर्मकृतं यथा॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
उस वन में विचरण करते हुए महामना भगवान युधिष्ठिर ने उस सरोवर को देखा जो सुवर्णमय केसर के पुष्पों से सुशोभित था। ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं विश्वकर्मा ने ही उसका निर्माण किया हो॥44॥
 
While wandering in that forest, the very illustrious Lord Yudhishthir saw the lake which was adorned with golden colored saffron flowers. It seemed; Vishwakarman himself has created it. 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)