श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 312: पानी लानेके लिये गये हुए नकुल आदि चार भाइयोंका सरोवरके तटपर अचेत होकर गिरना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.312.4 
सहदेव उवाच
शकुनिस्त्वां यदाजैषीदक्षद्यूतेन भारत।
स मया न हतस्तत्र तेन प्राप्ता: स्म संशयम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सहदेव बोले - भरत! जब शकुनि ने तुम्हें जुए में हरा दिया था और उस समय मैंने उसे नहीं मारा था, उसी का परिणाम है कि आज हम दुविधा में पड़ गए हैं॥4॥
 
Sahadeva said - Bhaarat! When Shakuni defeated you in gambling and I did not kill him at that time, the result of that is that today we have fallen into a dilemma.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)