श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 312: पानी लानेके लिये गये हुए नकुल आदि चार भाइयोंका सरोवरके तटपर अचेत होकर गिरना  »  श्लोक 35-36
 
 
श्लोक  3.312.35-36 
भीमसेनस्तथेत्युक्त्वा तं देशं प्रत्यपद्यत॥ ३५॥
यत्र ते पुरुषव्याघ्रा भ्रातरोऽस्य निपातिता:।
तान् दृष्ट्वा दु:खितो भीमस्तृषया च प्रपीडित:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
तब भीमसेन 'बहुत अच्छा' कहकर उस स्थान पर गए जहाँ तीनों पुरुषसिंह भाई भूमि पर लेटे हुए थे। उन्हें उस अवस्था में देखकर भीमसेन को बड़ा दुःख हुआ। यहाँ प्यास भी उन्हें बहुत कष्ट दे रही थी।
 
Then Bhimsena said 'very good' and went to the place where the three Purushsingh brothers were lying on the ground. Bhimsena felt very sad seeing them in that condition. Here thirst was also giving them a lot of trouble.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)