श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 312: पानी लानेके लिये गये हुए नकुल आदि चार भाइयोंका सरोवरके तटपर अचेत होकर गिरना  »  श्लोक 33-35h
 
 
श्लोक  3.312.33-35h 
अथाब्रवीद् भीमसेनं कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर:॥ ३३॥
नकुल: सहदेवश्च बीभत्सुश्च परंतप।
चिरं गतास्तोयहेतोर्न चागच्छन्ति भारत॥ ३४॥
तांश्चैवानय भद्रं ते पानीयं च त्वमानय।
 
 
अनुवाद
तब कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर ने भीमसेन से कहा, 'परन्तप! हे भरतपुत्र! नकुल, सहदेव और अर्जुन जल लेने गए हैं। बहुत देर हो गई है। वे अभी तक नहीं आए हैं। तुम्हारा कल्याण हो। तुम जाकर उन्हें बुला लाओ और जल भी ले आओ।'॥33-34 1/2॥
 
Then Yudhishthira, son of Kunti, said to Bhimasena, 'Parantapa! O son of Bharata! Nakula, Sahadeva and Arjuna have gone to fetch water. It is very late. They are not yet coming. May you be blessed. You go and call them and bring water too.'॥ 33-34 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)